!! बम भोले मेरे नाथ खरगेश्वर !!
बम भोले मेरे नाथ खर्गेश्वर
तन भष्म रमा ओढ़े बाघम्बर ।
त्रिनेत्र जब खोले त्रिलोकी
हिले धरा और डोले अम्बर ।।
डाल दृष्टि करुणा कृपा की
कुसमौल को धन्य किया ।
चरण कमल पद चिन्हों से
ये धरा को पावन स्वर्ग किया ।।
जगदव्यापी त्रिलोकेश दिगम्बर
बम भोले मेरे नाथ खर्गेश्वर
तन भष्म रमा ओढ़े बाघम्बर ।।
जो भी आया दर पर भोले
बिन मांगे सब कुछ पाया है ।
करो निहाल हे कृपा सिन्धु
"बटोही" जग से ठुकराया है ।।
शितिकण्ठ शिवाप्रिय गंगाधर
बम भोले मेरे नाथ खर्गेश्वर
तन भष्म रमा ओढ़े बाघम्बर ।।
गीतकार -
निशान्त झा "बटोही"
बम भोले मेरे नाथ खर्गेश्वर
तन भष्म रमा ओढ़े बाघम्बर ।
त्रिनेत्र जब खोले त्रिलोकी
हिले धरा और डोले अम्बर ।।
डाल दृष्टि करुणा कृपा की
कुसमौल को धन्य किया ।
चरण कमल पद चिन्हों से
ये धरा को पावन स्वर्ग किया ।।
जगदव्यापी त्रिलोकेश दिगम्बर
बम भोले मेरे नाथ खर्गेश्वर
तन भष्म रमा ओढ़े बाघम्बर ।।
जो भी आया दर पर भोले
बिन मांगे सब कुछ पाया है ।
करो निहाल हे कृपा सिन्धु
"बटोही" जग से ठुकराया है ।।
शितिकण्ठ शिवाप्रिय गंगाधर
बम भोले मेरे नाथ खर्गेश्वर
तन भष्म रमा ओढ़े बाघम्बर ।।
गीतकार -
निशान्त झा "बटोही"
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